देहरादून: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी और एक लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ योगेश भदौड़ा की काशीपुर में हुई गिरफ्तारी को लेकर अब बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। पुलिस जिसे अपनी बड़ी कामयाबी बता रही है, चर्चाओं में उसे एक सुनियोजित ‘सेफ कस्टडी’ की पटकथा कहा जा रहा है। जिसकी तलाश में उप्र पुलिस, एसटीएफ रात दिन तलाश में जुटी थी वह जेल चला गया। पुलिस के मुताबिक, 8 जुलाई 2026 की सुबह डायल-112 के जरिए सूचना मिली कि चैती मेला मार्ग पर एक संदिग्ध व्यक्ति खड़ा है। थाना आईटीआई की टीम ने मौके पर पहुंचकर योगेश भदौड़ा को हिरासत में ले लिया। उसके पास से एक देसी तमंचा और तीन कारतूस बरामद दिखाकर आर्म्स एक्ट में केस दर्ज किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस एक लाख के इनामी अपराधी को यूपी पुलिस महीनों से खोज रही थी, वह काशीपुर के एक सुनसान रास्ते पर तमंचा लेकर क्यों खड़ा था? और डायल-112 की एक कॉल पर उसने बिना किसी विरोध के आत्मसमर्पण जैसी गिरफ्तारी क्यों दे दी? क्या यह वाकई पुलिस की चौकसी थी या पहले से फिक्स स्क्रिप्ट।
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डी-75 गैंग का लीडर, जिस पर दर्ज हैं 46 गंभीर मुकदमे
आपराधिक रिकॉर्ड के अनुसार, योगेश भदौड़ा डी-75 गैंग का सरगना और हिस्ट्रीशीटर संख्या 43-ए है। उसके खिलाफ मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, सहारनपुर और गाजियाबाद समेत कई जिलों में हत्या, डकैती, लूट और गैंगस्टर एक्ट जैसे 46 संगीन मामले दर्ज हैं। उसके आपराधिक इतिहास में हत्या (धारा 302) के ही करीब 19 मुकदमे शामिल हैं। इतने बड़े और खतरनाक अपराधी को सिर्फ एक साधारण तमंचे की बरामदगी दिखाकर जेल भेजना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करता है।
एक लाख का इनामी बदमाश जिसके पीछे लगी थी उप्र पुलिस और काशीपुर में आकर चला गया महज एक तमंचे में चला गया जेल, उठ रहे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
