यहां तो रसूख की चमक के आगे आंख की रोशनी, जान दोनों ही सस्ती, अफसर की पत्नी ने पकड़ी कैंची एवं लेजर तो उखड़ गई मरीज की सांसें। अफसर की बीवी तो कानून के रखवालों ने भी फेरी नजर

  • देहरादून: कहते हैं कुमाऊं के द्वार’ हल्द्वानी से होकर ही पहाड़ों की शुद्ध हवा का रास्ता गुजरता है, लेकिन इन दिनों यहां के निजी अस्पतालों की हवा में लापरवाही और रसूख की बू आ रही है। ताजा मामला एक अस्पताल का है। यहां पर एक गरीब श्रमिक राजपाल की आँख का ‘सफल’ ऑपरेशन इतना सफल रहा कि मरीज की आत्मा ही शरीर से विदा हो गई। चर्चा यह है कि ऑपरेशन थियेटर में कैंची और लेजर थामने वाले हाथ किसी साधारण डॉक्टर के नहीं, वरन एक रसूखदार अफसर की पत्नी के थे। इसके बाद से अजीब सी ‘शालीनता’ और ‘खामोशी’ नजर आ रही है। आखिर साहब की रसोई तक पहुँचने वाली आंच, कोतवाली की फाइलों को झुलसाने का दम तो रखती ही है। 15 अप्रैल की रात पौने दस बजे तक चली सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने ‘ब्लड प्रेशर’ का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया। जब मरीज की नब्ज थम गई, तो उसे ‘रेफर’ करने का पुराना खेल खेला गया। राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु ने ठीक ही कहा है कि सरकारी सिस्टम की लाचारी ही इन निजी लुटेरों का हौसला बढ़ाती है। अब यह देखना होगा कि गरीब परिवार को इंसाफ मिलेगा या फिर उसके मुंह से बद्दुआ ही निकलेगी।

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