देहरादून: उत्तराखंड में अब खाकी भी बगावत पर है। आत्महत्या करना जुर्म पर हैं लेकिन बड़े साहब के उत्पीड़न से तंग आकर एक कोतवाल ने तो आत्महत्या करने जा रहा हूं का मैसेज लिखकर दरवाजा बंद कर लिया। जब रक्षक ही जब अपने महकमे के सिस्टम से हारकर जान देने पर उतारू हो जाएं, तो सवाल उठना लाजिमी है। पुलिस विभाग के अंदरूनी कलह, बढ़ते मानसिक तनाव और उच्चाधिकारियों के ‘बॉस कल्चर’ की पोल खोल कर रख दी है। ‘ऑफीसर व्हाट्सएप ग्रुप’ में उनका एक मैसेज गिरा— “मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं।” इस एक लाइन ने महकमे की सांसें अटका दीं। आनन-फानन में पुलिसकर्मियों ने बालकनी के रास्ते चढ़कर दरवाजा तोड़ा और ऐन मौके पर कोतवाल साहब को मौत के मुंह से खींच लिया। सूत्रों और महकमे की अंदरूनी चर्चाओं की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम और एक इंस्पेक्टर को मौत के मुहाने तक धकेलने के पीछे बड़े साहब जिम्मेदार है। बताते चले कि इन बड़े साहब के इस रवैये के तमाम चर्चे मौजूद है। अब देखना हाेगा कि आखिर आला अधिकारी क्या कदम उठाते थे या फिर चुप रहते हैं।
बगावत या अदावत बड़े साहब से तंग आकर कोतवाल ने किया मैसेज में जा रहा हूं आत्महत्या करने में, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप। पुलिस महकमे में उठ रहे सवाल आखिर बड़े साहब के उत्पीडन पर क्यों चुप है आला अधिकारी
