
उधम सिंह नगर/हल्द्वानी: इंस्पेक्टर विक्रम राठौर और चाैकी इंचार्ज के लाइन हाजिर होन के बाद से सोशल मीडिया पर कुख्यात योगेश भदौड़ा चर्चाओं में आ गया है। सोशल मीडिया पर फिल्मी गानों, भारी-भरकम डायलॉग्स और लाखों की फौज के दम पर खुद को जनता का मसीहा दिखाने वाले इंस्पेक्टर विक्रम राठौर आज खुद कानून के घेरे में हैं।अपराधियों की पीठ थपथपाने और वर्दी के रसूख का बेजा इस्तेमाल करने का साहब का इतिहास काफी पुराना है, जिसकी कड़ियां साल 2019 के एक बहुचर्चित खूनी खेल से जुड़ती हैं।
तारीख थी 15 दिसंबर 2019। जगह—हल्द्वानी का सबसे व्यस्त रहने वाला सिंधी चौक (मंगल पड़ाव)। दोपहर के वक्त व्यापारी भूपेंद्र पांडेय को सरेराह गोलियों से भून दिया गया था। (Case Crime No. 486/2019, IPC 302, 394 व आर्म्स एक्ट)। कानून की लंबी लड़ाई के बाद नवंबर 2023 में अदालत ने मुख्य आरोपी सौरभ गुप्ता और गौरव गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल तो भेज दिया, लेकिन इस हत्याकांड ने तत्कालीन पुलिसिंग पर कई बड़े सवाल छोड़े थे। वारदात के बाद मृतक भूपेंद्र पांडेय के परिजनों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि हत्यारे गुप्ता बंधुओं को किसी और का नहीं, बल्कि तत्कालीन हल्द्वानी कोतवाल विक्रम राठौर का वरदहस्त प्राप्त था। उस वक्त भड़के भारी जनाक्रोश और कोतवाली के घेराव के बाद, बदनामी से बचने के लिए तत्कालीन कप्तान ने राठौर को लाइन हाजिर कर पिथौरागढ़ भेज दिया था। हालांकि इस मामले में लीपापाेती कर दी गई। विक्रम राठौर को पहले कुंडा का थाना प्रभारी बनाया गया लेकिन चंद दिनों में आईटीआई थाने का प्रभार मिला। एक जनप्रतिनिधि से उनके रसूख किसी से छिपे नहीं है। उप्र पुलिस की मेहनत पर पानी फेरने वाली इस जनप्रतिनिधि की कुंडली भी अब उप्र एसटीएफ ने खंगालना शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि खादीधारी ने ही करोड़ों की डील कर कुख्यात योगेश भदौड़ा की सेफ कस्टडी का रनवे तैयार किया। हमेशा ओटामेटिक हथियारों से लैश योगेश भदौड़ा जंग लगे तमंचे के साथ पकड़ा गया यह कहानी किसी के गले नहीं उतर रही है।
उत्तराखंड में बन रहा खाकी का गठजोड़, कुख्यात भदौड़ा की सेफ कस्टडी के मामले में चर्चाओं में आए इंस्पेक्टर विक्रम राठौर का विवादों से पुराना नाता, जो कुख्यात चलता था फोरचूनर गाड़ी और ओटोमेटिक हथियारों के साथ वह जंग लगे तंमचे के साथ कैसे पकड़ा, यह नहीं उतर रहा किसी के गले
