भक्ति----घंटों करती है एकांत में श्रीकृष्ण से वार्ता, रखती है व्रत
-जन्मदिवस से एक दिन पहले खुद बाजार से करती है खरीददारी, आश्रम में जाकर वितरित करती है उपहार
जगदीश शर्मा देशप्रेमी:
रूड़कीं जब भगवान की भक्ति में लीन हो तो उनकी प्रतिमा भी बोल उठती है। ऐसा ही कुछ महसूस करती है कि जादूगर रोड निवासी 88 वर्षीय श्रीमती उर्मिला देवी। वह श्रीकृष्ण की अनन्य भक्ति में इस तरह से लीन रहती कि वह सुबह साढ़े तीन बजे बिस्तर से उठकर कान्हा जी को उठाती है। उनको मां यशोदा की भांति स्नान करती हैं और फिर बालक की भांति उनका श्रृंगार करती हैं। श्रृंगार करने के बाद वह तीन से चार घंटे तक उनके सामने बैठकर खुब बाते करती है। कभी रोने लगी है तो कभी उनका दुलार करती है। रोते-रोते कहती है कि आप तो बैठे हैं हो वैकुण्ठ धाम और मुझे यहाँ पर अकेला छोड़ गए। ठाकुर जी आपका में शुक्रिया कैसे अदा करूं आपने मुझे जीवन में बहुत कुछ दिया है।
इतना ही नहीं कान्हा के जन्मदिवस की एक दो महीने पहले से ही ख़ुद बाज़ार जाकर अपने आप से जितने भी घर पर काम करने वाले और वृंदावन में साधु बेला आश्रम में काम करने वाले हरिद्वार के साधुबेला आश्रम में काम करने वाले सबके लिए कुछ न कुछ उपहार लाती हैं। उनको अपने हाथों से बांटती है। साथ ही पूछती है कि किसको क्या चाहिए। इतना ही नहीं जन्माष्टमी के दिन तो सारा दिन मंदिर के सामने बैठकर ही भजन कीर्तन करती रहती है। पूरे परिवार को साथ बैठाती हैं और कान्हा के बारे में बताती है।
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